UP: वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और धनराशि को गलत तरीके से निकाले जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने साफ निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की ओर से दी जाने वाली प्रत्येक राशि दानपेटी में डाली जाए या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर की कोषागार में जमा की जाए।
जानिए क्या है पूरा मामला?
अदालत में बताया गया कि एक वीडियो में तीन लोग मंदिर की पारंपरिक दानपेटी यानी गोलक के पास खड़े नजर आ रहे हैं। आरोप है कि वे श्रद्धालुओं से प्राप्त रकम को पॉलीथिन की थैलियों में जमा कर रहे थे। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि मंदिर में चढ़ावे की राशि के संग्रह की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
Supreme Court ने कहा कि दान के रूप में मिलने वाली हर राशि दानपेटी या ऑनलाइन माध्यम के जरिए मंदिर की कोषागार तक पहुंचनी चाहिए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मंदिर की कोषागार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा।
अदालत ने मंदिर प्रबंधन समिति को कोषागार व्यवस्था में पारदर्शी प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे का पूरा विवरण मंदिर के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करना है।
सुप्रीम कोर्ट ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की प्रबंधन समिति की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अदालत के निर्देशों का मुख्य उद्देश्य मंदिर में चढ़ावे के संग्रह और उसके प्रबंधन को पारदर्शी बनाना है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन का दुरुपयोग रोका जा सके और प्रत्येक राशि का स्पष्ट हिसाब मंदिर के आधिकारिक कोष में दर्ज हो।







