कानपुर ।- रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के क्रियान्वयन को लेकर पंडित कुंदनलाल शुक्ला महाविद्यालय में जारी किए गए नोटिस पर सवाल उठने लगे हैं। महाविद्यालय में 21 अगस्त 2026 को चस्पा किए गए नोटिस में वर्ष 2025-26 में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण छात्राओं की कुछ श्रेणियों को 23 अगस्त 2026 तक योजना के लिए महाविद्यालय में संपर्क करने को कहा गया। वहीं, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर की ओर से जारी पत्र में संबंधित महाविद्यालयों से पात्र छात्राओं का विवरण 22 अगस्त 2026 को शाम 5 बजे तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में सवाल यह है कि पात्र छात्राओं तक सूचना पहुंचाने, आवश्यक दस्तावेज जुटाने और उनका विवरण तैयार करने के लिए उन्हें पर्याप्त समय आखिर कैसे मिल पाता?
21 अगस्त को विश्वविद्यालय का पत्र, 22 अगस्त शाम 5 बजे तक मांगा विवरण
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के परीक्षा नियंत्रक की ओर से जारी पत्र पर 21 अगस्त 2026 की तारीख दर्ज है। पत्र का विषय रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के क्रियान्वयन के लिए शासन के निर्देशों के क्रम में वर्ष 2025-26 में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण दिव्यांग एवं निराश्रित छात्राओं तथा शहीद सैनिकों के आश्रितों की सूचना उपलब्ध कराने से संबंधित है।
विश्वविद्यालय के पत्र में पात्र छात्राओं की विभिन्न श्रेणियों का उल्लेख करते हुए संबंधित महाविद्यालयों को आवश्यक विवरण और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित अभिलेख निर्धारित ई-मेल पर 22 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे तक अनिवार्य रूप से भेजे जाएं।
यानी विश्वविद्यालय का पत्र 21 अगस्त को जारी हुआ और अगले ही दिन शाम तक विवरण उपलब्ध कराने की समय-सीमा रखी गई।
कॉलेज में 21 अगस्त को चस्पा हुआ नोटिस
दूसरी ओर, पंडित कुंदनलाल शुक्ला महाविद्यालय से संबंधित उपलब्ध नोटिस में वर्ष 2025-26 में उत्तीर्ण छात्राओं को सूचना दी गई है। इसमें उन छात्राओं का उल्लेख है जिनके माता या पिता अथवा दोनों नहीं हैं, दिव्यांग छात्राएं तथा वे छात्राएं जिनके पिता सैनिक के रूप में शहीद हुए हैं।
नोटिस में इन छात्राओं से 23/08/26 तक रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना हेतु महाविद्यालय में संपर्क करने को कहा गया है। साथ ही यह भी लिखा है कि अन्यथा की स्थिति में महाविद्यालय की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
नोटिस पर प्राचार्य के हस्ताक्षर हैं और दो संपर्क नंबर भी दिए गए हैं।
शुक्रवार को सूचना, रविवार तक अंतिम तारीख
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू तारीखों का अंतर है।
21 अगस्त 2026 — शुक्रवार: विश्वविद्यालय का पत्र जारी और कॉलेज में नोटिस चस्पा किए जाने की बात।
22 अगस्त 2026 — शनिवार: विश्वविद्यालय ने संबंधित विवरण शाम 5 बजे तक मांगा।
23 अगस्त 2026 — रविवार: कॉलेज के नोटिस में छात्राओं से संपर्क करने की अंतिम तारीख।
ऐसे में सवाल उठता है कि पात्र छात्राओं को वास्तविक रूप से कितना समय मिला? यदि किसी छात्रा को 21 अगस्त को नोटिस की जानकारी मिली, तो उसे पात्रता से जुड़े दस्तावेज जुटाने, प्रमाणपत्र तैयार कराने और महाविद्यालय में संपर्क करने के लिए बेहद कम समय मिला।
क्या दूर-दराज की छात्राओं को मिला पर्याप्त अवसर?
योजना का लाभ लेने वाली छात्राओं में ऐसी छात्राएं भी हो सकती हैं जिन्हें विभिन्न प्रमाणपत्र और दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। विश्वविद्यालय के पत्र में दिव्यांगता, निराश्रित स्थिति तथा शहीद सैनिक के आश्रित होने से जुड़े विवरण/अभिलेखों की आवश्यकता बताई गई है।
ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि यदि सूचना अंतिम समय में सार्वजनिक की जाती है, तो दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाली पात्र छात्राओं को इसकी जानकारी कैसे मिलेगी और वे इतने कम समय में आवश्यक प्रक्रिया कैसे पूरी करेंगी?
क्या प्रक्रिया केवल औपचारिकता तक सीमित रह गई
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पात्र छात्राओं तक सूचना पहुंचाने के लिए कॉलेज स्तर पर अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया था। उपलब्ध नोटिस में छात्राओं से महाविद्यालय में संपर्क करने की अपील तो की गई है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि नोटिस से पहले या इसके साथ छात्राओं को व्यक्तिगत रूप से, फोन, वेबसाइट या अन्य माध्यमों से सूचना दी गई थी या नहीं।
इसलिए इसे सीधे तौर पर जानबूझकर की गई लापरवाही कहना उचित नहीं होगा, लेकिन समय-सीमा और सूचना प्रसारित करने के तरीके पर सवाल जरूर खड़े होते हैं।
विश्वविद्यालय के पत्र में टॉप 5 प्रतिशत छात्राओं का भी उल्लेख
विश्वविद्यालय के पत्र में योजना के लिए पात्रता से संबंधित अन्य मानदंडों का भी उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं में से टॉप 05 प्रतिशत छात्राओं को योजना से आच्छादित किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा निर्धारित मेरिट से 10 प्रतिशत कम अंकों वाली शहीद परिवारों की मेधावी छात्राओं तथा दिव्यांग एवं निराश्रित छात्राओं को भी योजना के लिए पात्र बताए जाने का उल्लेख है।
*इससे स्पष्ट है कि योजना से संबंधित प्रक्रिया में पात्र छात्राओं की पहचान और उनके दस्तावेज समय से तैयार करना महत्वपूर्ण है।*
प्रशासन से जवाब की जरूरत
पूरे मामले में अब महाविद्यालय प्रशासन से यह स्पष्ट किए जाने की जरूरत है कि नोटिस 21 अगस्त को किस समय चस्पा किया गया, कितनी छात्राओं तक इसकी जानकारी पहुंचाई गई और 23 अगस्त की अंतिम तारीख, जो रविवार थी, को छात्राओं के लिए संपर्क की क्या व्यवस्था थी।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय द्वारा 22 अगस्त शाम 5 बजे तक विवरण मांगे जाने के बाद कॉलेज स्तर पर पात्र छात्राओं के दस्तावेज और सूचनाएं किस प्रकार संकलित की गईं।
बड़ा सवाल
जब विश्वविद्यालय ने 21 अगस्त को पत्र जारी कर 22 अगस्त शाम 5 बजे तक पात्र छात्राओं का विवरण मांगा, तो पात्र छात्राओं को पर्याप्त समय देकर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
यह मामला केवल एक नोटिस की तारीख का नहीं, बल्कि उन पात्र छात्राओं के अवसर का है जो समय पर सूचना न मिलने या कम समय मिलने के कारण योजना के लाभ से वंचित हो सकती हैं।







